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देवकी जोशी: पिथौरागढ़ की वह महिला जिनकी ‘कुमाऊँ नमकीन’ ने हिमालयी स्वाद को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

  • Writer: Rahul Tripathi
    Rahul Tripathi
  • Nov 21, 2025
  • 2 min read

उत्तराखंड की धरती में स्व–रोज़गार और संकल्प की कहानियाँ अनगिनत हैं —पर उनमें से कुछ कहानियाँ इतनी चमकदार होती हैं कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन जाती हैं। पिथौरागढ़ की श्रीमती देवकी जोशी की कहानी ऐसी ही एक अद्भुत मिसाल है।

एक छोटे से घर-आधारित व्यवसाय से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित उद्यमी बनने तक की उनकी यात्रा यह साबित करती है कि दृढ़ निश्चय, नवाचार और स्थानीय पहचान पर विश्वास—किसे भी कितनी दूर तक ले जा सकता है।

Mrs. Devki joshi, Founder Kumaon Namkeen Pithoragarh
Mrs. Devki joshi, Founder Kumaon Namkeen Pithoragarh

शुरुआत: एक साधारण विचार, लेकिन मजबूत दृष्टि

साल 1995, जब पहाड़ों में महिलाओं का स्व-रोज़गार एक नई अवधारणा थी, उसी समय देवकी जोशी ने अपने बल पर कुछ शुरू करने का फैसला किया।

उन्होंने रोज़मर्रा की पहाड़ी जीवनशैली की एक पुरानी परंपरा में व्यवसाय की संभावना देखी—पारंपरिक अनाज।

मंडुवा (फिंगर मिलेट) और अन्य स्थानीय अनाजों का उपयोग करके उन्होंने कुरकुरे, स्वादिष्ट और सेहतमंद स्नैक्स तैयार करने शुरू किए—यही आगे चलकर बने “कुमाऊँ नमकीन”

मार्केटिंग का कोई अनुभव नहीं, संसाधन सीमित—फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।अपने घर की रसोई में नमकीन बनाना और फिर दुकानों पर जाकर खुद बेचने का सफर शुरू हुआ।धीरे-धीरे इनके असली पहाड़ी स्वाद और पौष्टिकता ने लोगों का दिल जीतना शुरू कर दिया।


संघर्षों को ताकत में बदलना

शुरुआती वक्त बेहद चुनौतीपूर्ण था।

  • दुकानदारों को मनाना

  • एक जैसी गुणवत्ता बनाए रखना

  • उत्पादन अकेले संभालना

हर कदम पर कठिनाइयाँ थीं, लेकिन देवकी जोशी पीछे नहीं हटीं।जो भी मुनाफ़ा मिलता, वे उसे फिर से काम में लगातीं—बेहतर सामग्री, बेहतर पैकेजिंग और बड़े बाज़ार तक पहुँच के लिए।

उनकी मेहनत रंग लाई।कुछ ही वर्षों में कुमाऊँ नमकीन पिथौरागढ़ और आसपास के जिलों का एक जाना-पहचाना नाम बन गया।

आज उनके उत्पाद न केवल पूरे उत्तराखंड में बल्कि दिल्ली और देश के कई अन्य शहरों में भी बिकते हैं, जहाँ लोग असली हिमालयी स्वाद की तलाश में रहते हैं।


दूसरों को भी सशक्त बनाने की राह

देवकी जोशी की कहानी सिर्फ व्यवसाय की नहीं —यह रोज़गार के अवसर पैदा करने की कहानी भी है।

उनके छोटे उद्योग ने अब तक सीधे और परोक्ष रूप से 200 से अधिक लोगों को रोजगार दिया है—जिनमें से अधिकांश स्थानीय महिलाएं और युवा हैं।

उन्होंने साबित किया कि स्व-रोज़गार सिर्फ अपनी जीविका का साधन नहीं—दूसरों की आजीविका भी बन सकता है।


सम्मान और पहचान

महिला उद्यमिता और स्थानीय उद्योग में उनके असाधारण योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।देवकी जोशी को कई महत्वपूर्ण पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें शामिल है—

तेलू रौतेली पुरस्कार —उत्तराखंड की महिलाओं के लिए दिया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित सम्मान।

उनकी यात्रा “मेक इन उत्तराखंड” की सच्ची परिभाषा है—स्थानीय सामग्री, स्थानीय हाथ, और राष्ट्रीय (यहां तक कि वैश्विक) पहचान।


पहाड़ की हर महिला के लिए प्रेरणा

आज देवकी जोशी उत्तराखंड की हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।उनकी कहानी बताती है कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए महानगरों की नहीं—विश्वास, मेहनत और छोटे कदमों से शुरुआत की जरूरत होती है।

पिथौरागढ़ की रसोई से लेकर महानगरों की दुकानों तक—कुमाऊँ नमकीन सिर्फ स्वाद नहीं लाता, बल्कि उस महिला की आत्मा भी साथ लाता है जिसने अपने आप पर और अपनी जड़ों पर भरोसा किया।

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