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पहाड़ों में कामयाबी की डिलीवरी: कैसे इंजीनियर ऋत्विक शाह ने पिथौरागढ़ में ‘डाजू मील्स’ के साथ फ़ूड डिलीवरी का नया युग शुरू किया।

  • Writer: Rahul Tripathi
    Rahul Tripathi
  • Nov 21, 2025
  • 2 min read

आज के समय में जब युवा पेशेवर बेंगलुरु जैसे तकनीकी शहरों में कॉर्पोरेट सपनों का पीछा करते हैं, वहीं एक युवा इंजीनियर ने तकनीक को घर लौटाने का फैसला किया।

रित्विक शाह, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, बेंगलुरु की एक प्रतिष्ठित टेक कंपनी में काम करते थे।मेट्रो शहर सुविधाओं से भरा था—ऐप्स, डिलीवरी, तेज़ जिंदगी।

लेकिन रित्विक के मन में एक सवाल बार-बार उठता रहा—“यह सब पिथौरागढ़ में क्यों नहीं?”

यहीं से शुरू हुई एक ऐसी यात्रा, जिसने उनके गृहनगर में खाने के अनुभव को बदलकर रख दिया।


टेक हब से पहाड़ी रास्तों तक

सॉफ्टवेयर और प्रोडक्ट डिज़ाइन का अनुभव लेकर रित्विक ने एक साहसिक निर्णय लिया—उन्होंने बेंगलुरु की आरामदायक नौकरी छोड़कर पिथौरागढ़ वापसी की। उन्होंने एक महत्वपूर्ण कमी देखी:

  • बड़े शहरों में Zomato और Swiggy जैसे दिग्गज

  • लेकिन छोटे शहरों में कोई संगठित फूड डिलीवरी सिस्टम नहीं

  • स्थानीय खाना तो भरपूर, लेकिन सुविधा की कमी

  • डिजिटल सेवाओं की मांग बढ़ रही थी, पर आपूर्ति नहीं

यही कमी रित्विक के स्टार्टअप का बीज बनी—डाजू मील्स (Daju Meals)।


शुरूआत — ज़ीरो से शुरू करना आसान नहीं था।

  • स्थानीय रेस्टोरेंट्स को जोड़ना

  • मेन्यू रजिस्टर कराना

  • एक युवा उद्यमी के डिजिटल आइडिया पर उनका भरोसा जीतना

  • सीमित डिजिटल पहुंच वाले शहर में मार्केटिंग


सब कुछ चुनौती से भरा था। रित्विक ने खुद रेस्टोरेंट्स में जाकर समझाया,स्टाफ को ट्रेन किया,डिलीवरी लॉजिस्टिक्स संभाला,और जमीन से पूरा मॉडल खड़ा किया—ईंट दर ईंट, और बाइट दर बाइट।

धीरे-धीरे लोगों तक बात पहुँची।ऑर्डर आने लगे।रेस्टोरेंट्स को फायदा दिखा और एक व्यक्ति का सपना धीरे-धीरे पूरे समुदाय की सफलता बन गया।


स्थानीय मॉडल जिसने दिग्गजों को पीछे छोड़ा

आज डाजू मील्स पिथौरागढ़ के भोजन जगत में एक भरोसेमंद नाम बन चुका है। जो एक छोटा सा स्टार्टअप था, वह अब एक मजबूत स्थानीय इकोसिस्टम बन गया है — रेस्टोरेंट्स, डिलीवरी पार्टनर्स और ग्राहकों को जोड़ने वाला। और हैरानी की बात यह है:

डाजू मील्स आज पिथौरागढ़ में Zomato से भी बेहतर प्रदर्शन करता है।

  • तेज़ डिलीवरी

  • मजबूत स्थानीय साझेदारियाँ

  • ग्राहकों की अधिक संतुष्टि

इसके पीछे एक ही कारण है—स्थानीय ज़रूरतों की गहरी समझ। पहाड़ी रास्तों पर किस समय डिलीवरी आसान है,कौन से कैफ़े किस समय चलते हैं,स्थानीय भोजन संस्कृति क्या है — इन्हीं बारीकियों ने डाजू मील्स को खास बनाया है।


वापसी, जज़्बा और नई शुरुआत की कहानी

रित्विक की कहानी रिवर्स माइग्रेशन का प्रेरक उदाहरण है—जहाँ बड़े शहरों में सीखी गई तकनीक को लेकर युवा अपने शहर लौटते हैंऔर समुदाय को आगे बढ़ाते हैं। उनकी सोच ने तकनीक और पहाड़ी परंपरा के बीच पुल बनाया है—यह दिखाते हुए कि इनोवेशन के लिए महानगर ज़रूरी नहीं।मकसद हो तो पहाड़ भी स्टार्टअप्स को जन्म दे सकते हैं।


आज रित्विक शाह पिथौरागढ़ के युवाओं को यह विश्वास दिला रहे हैं कि—स्टार्टअप्स सिर्फ बेंगलुरु और गुरुग्राम में नहीं बनते,वे पहाड़ों में भी जन्म ले सकते हैं। टेक पार्क्स में कोड लिखने से लेकर पहाड़ी शहरों में सुविधा पहुँचाने तक,रित्विक ने सिर्फ खाना नहीं पहुँचाया — उन्होंने एक संदेश पहुँचाया:

महत्वाकांक्षा का मतलब हमेशा घर छोड़ना नहीं होता।कभी-कभी, इसका मतलब होता है घर लौटकर कुछ ऐसा बनाना,जिस पर पहाड़ गर्व कर सकें।

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