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रेखा भंडारी: पहाड़ों की मिट्टी से उगी एक उद्यमी - जो पूरी पीढ़ी को रास्ता दिखा रही हैं।

  • Writer: Rahul Tripathi
    Rahul Tripathi
  • Nov 21, 2025
  • 2 min read

पिथौरागढ़ की तीखी ढलानों और दूरस्थ गाँवों में उद्यमिता की कहानियाँ अक्सर कठिनाइयों से शुरू होती हैं—बाज़ारों तक सीमित पहुँच, चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियाँ, और ढांचा-सुविधाओं की कमी।

लेकिन रेखा भंडारी जैसी महिलाओं के लिए ये बाधाएँ नहीं—यही वे बीज हैं जिनसे अवसर जन्म लेता है।


किसान से प्रेरणास्रोत तक का सफर

पिथौरागढ़ ज़िले के जजरौली गाँव की रहने वाली रेखा भंडारी आज एक प्रगतिशील किसान से उद्यमी बनीं—और क्षेत्र की एग्री-एंटरप्रेन्योर महिलाओं के लिए एक मिसाल।

जहाँ अधिकतर लोग रोज़गार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं, वहीं रेखा ने अपने पहाड़ की मिट्टी, स्थानीय संसाधनों और सामुदायिक शक्ति को आधुनिक उद्यमिता का आधार बनाया। उन्होंने अपने घर-गाँव को छोड़ा नहीं, बल्कि उसी को संभावनाओं की भूमि में बदल दिया।

Rekha Bhandari taking care of her household chores & her farm lands
Rekha Bhandari taking care of her household chores & her farm lands

परंपरा का उपयोग, उद्यम का निर्माण

रेखा की यात्रा के केंद्र में एक विश्वास है—“पहाड़ों में पहले से ही मूल्य छिपा है—मिट्टी में, फसलों में, परंपराओं में।”

उन्होंने दिखाया कि महिलाओं के स्वयं-सहायता समूह (SHGs) और उत्पादक समूहों को संगठित करके किस तरह पारंपरिक गतिविधियों को भी उद्यम में बदला जा सकता है।

महिला किसानों के समूहों को उत्पादन, मूल्य-वर्धन (value addition) और बाज़ार-लिंक से जोड़कर, रेखा ने आजीविका को सिर्फ जीविका नहीं, बल्कि उद्यम बना दिया।

उनके काम ने स्थानीय महिलाओं और युवाओं में यह आत्मविश्वास जगाया कि—शिक्षा का स्तर, गाँव का स्थान या पृष्ठभूमि उद्यमिता की राह में बाधा नहीं बनते।


स्थानीय आजीविका का बदलता पारिस्थितिकी तंत्र

रेखा का प्रभाव सिर्फ उनकी अपनी खेती तक सीमित नहीं है।उन्होंने पिथौरागढ़ में एक ऐसा लोकल इकोसिस्टम खड़ा करने में मदद की है जहाँ कृषि आधारित आजीविका मौसमी संघर्ष से निकलकर टिकाऊ आय का मॉडल बन रही है।

इस परिवर्तन के परिणामस्वरूप—

  • अधिक महिलाएँ उत्पादक समूहों से जुड़ रही हैं

  • पहाड़ों से अधिक मूल्य-वर्धित उत्पाद निकल रहे हैं

  • और स्थानीय उद्यमों को "गंभीर व्यवसाय" के रूप में पहचाना जाने लगा है

यह बदलाव सिर्फ आर्थिक नहीं—सामाजिक भी है।


अगली पीढ़ी को प्रेरित करती हुई

“लोकल आजीविका करियर समिट फ़ॉर यूथ एंटरप्रेन्योर्स” जैसे आयोजनों में रेखा ने अपने अनुभव साझा किए हैं।उनका संदेश युवाओं के लिए बेहद सशक्त है:

“आपकी ज़मीन, आपके संसाधन, आपका समुदाय—यही आपका कारोबार बन सकता है।”


Rekha Bhandari with her farm machine & "Shrestha Kisan Puraskar" that she won.
Rekha Bhandari with her farm machine & "Shrestha Kisan Puraskar" that she won.

क्यों महत्वपूर्ण है उनकी कहानी


महिला-नेतृत्व वाला बदलाव:जहाँ उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में महिला उद्यमिता अभी भी बढ़ रही है, रेखा इस बात का उदाहरण हैं कि जब महिलाएँ नेतृत्व करती हैं, तो परिवर्तन कितना गहरा होता है।

समुदाय आधारित मॉडल:यह व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं—यह समूहों, नेटवर्क और सामूहिक विकास की कहानी है।

वैल्यू-एडिशन पर फोकस:सिर्फ खेती नहीं—प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग।उत्पाद में स्थानीय स्तर पर मूल्य जोड़कर, उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि अधिक मुनाफ़ा पहाड़ों में ही रहे।

दूसरे जिलों के लिए मॉडल:उनका तरीका अन्य पर्वतीय जिलों में भी दोहराया जा सकता है—जहाँ स्थानीय कच्चे माल को आजीविका इंजन में बदला जा सकता है।


रेखा भंडारी की कहानी हमें यह सिखाती है—सफल उद्यम बनाने के लिए शहर जाना ज़रूरी नहीं।कभी-कभी, सफलता वहीं उगती है जहाँ हम जन्म लेते हैं—बस उसे नए नज़रिये से देखने की देर होती है।

उत्तराखंड के युवाओं के लिए, और खासतौर पर पहाड़ों की महिलाओं के लिए, रेखा की यात्रा एक स्पष्ट संदेश है:

पहाड़ी जड़ें कमजोरी नहीं—एक अनोखी ताकत हैं।

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